जो आपने अपने जीवन में सीखा, पुस्तकों से सीखा, गुरुओं से सीखा,
उसको निरन्तर दोहराओ जिससे ञान आपके काम आ सके।
भय ,डर,चिंता से डरना नहीं उससे भागो मत् ,भय का मज़ाक उड़ाना सीखो !
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
अभ्यास से ही आदत बनती है। अच्छाई का अभ्यास लगातार करते जाइए वह आदत बन जाएगी।
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
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जन्म देने वाले मालिक ने जीभ तो बनाई एक, पर कान बनाए दो। दो कान इसलिए बनाए कि ज्यादा सुन लेना, लेकिन ज्यादा बोलना नहीं । जितना बोलना नाप-तोल कर ही बोलना।
जीभ के आगे भगवान ने दरवाज़ा लगाया है, इसे बन्द करने के लिए। जिन्दगी में इंसान जितना भी बुरा करता है, ज्यादातर तो बुरा इस जीभ से ही करता है। इस जीभ का प्रयोग हथियार के रुप में कभी मत करना।"