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Thursday, October 20, 2016

भूतकाल को याद


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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

भूतकाल को याद करने में और भविष्य की चिन्ता करने में समय बर्बाद न करें, क्योंकि भूतकाल वापिस आएगा नहीं और भविष्य अभी दूर है।  
अपने वर्तमान का सदुपयोग करें। हर दिन को व्यवस्थित ढ़ग से व्यतीत करें। 

Wednesday, October 19, 2016

इंसान को संसार

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 


इंसान को संसार मैं बसना चाहिए लेकिन संसार को अपने मन मैं बसाना नहीं चाहिए 

Wednesday, October 5, 2016

jigyasa aur samadhan: जिज्ञासु :-पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही ...: To SEE MORE POSTINGS () VISIT BLOGS जिज्ञासु :- पूज्य गुरूदेव : अगर भाग्य के अनुसार ही मिलता है तो जीवन में कर्म क़ा क्या ... 

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वाणी की मधुरता

वाणी की मधुरता मित्रता बढ़ाती है और वाणी की कठोरता के कारण व्यक्ति अपनों से भी दूर हो जाता है। 


परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Wednesday, August 24, 2016

हे प्रभु। सारा संसार ही तेरा परिवार है।


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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 


हे प्रभु। सारा संसार ही तेरा परिवार है।
हे जगत के नियन्ता जगदीश्वर। हे नारायण। हे शुद्ध, बुद्ध, मुक्तस्वभाव। हे जन्म और जीवन देने वाले परमपिता परमात्मा। हम सभी भक्तों का श्रद्धा भरा प्रणाम आपके श्रीचरणों में स्वीकार हो। हे प्रभु। सारा संसार ही तेरा परिवार हे, तेरे चरणों में आनंद का वास हे , सभी के ह्रदयों में आपका निवास है।हे प्रभु। जिस मेधा बुद्धि को हमारे पूर्ववर्त्ती ज्ञानी-ध्यानी तथा योगीजनों ने प्राप्त किया और अपना कल्याण किया उसी विशेष बुद्धि को आप हमें प्रदान करें।हे प्रभु हमें वह बुद्धि दो जिसके द्वारा हम सन्मार्ग पर चलकर आदर्श को धारण कर सकें तथा दोषों का परित्याग करें। हे प्रभु। हमारे बुद्धि के रथ को आप हांकने वाले बनें। हम सदैव अच्छा विचारें, अच्छे योजनाएं बनाएं, अच्छे हो जाएँ और संसार को सुंदर बना सकें। खुद तरें और औरों को भी तारें। हे दाता हमारी यही विनंती हे, इसे आप स्वीकार कीजिए। 

Monday, August 22, 2016

हे प्रभु हमारा ह्रदय आपके श्री चरणों से जुडे रहें

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

हे प्रभु हमारा ह्रदय आपके श्री चरणों से जुडे रहें
हे जीवन के आधार। सुख स्वरूप सचिदानंद परमेशवर। समस्त संसार में आपने अपनी कृपाओं को बिखेरा हुआ है। हमारा क्षद्धा भरा प्रणाम आपके श्रीचरणों में स्वीकार हो। हे प्रभु। जब हम अपने अंतर्मन में शान्ति स्थापित करते हैं तब हमारे अन्त:स्थ में आपके आनन्द की तरंगें हिलोरें लेने लगती हैं और हमारा रोम-रोम आनन्द से पुलकित होने लगता है। जिससे हमारा व्यवहार रसपूर्ण और प्रेमपूर्ण हो जाता है। हे प्रभु! हमारा ह्रदय आपसे जुडा रहे, हम पर आपकी कृपा बरसती रहे, हमारा मन आपके श्रेचार्नोनें लगा रहे, यह आशीर्वाद हमें अवश्यदो  ताकि हम पर हर दिन नया उजाला, नई उमंगें, नया उल्लास लेकर जीवन के पथ पर अग्रसर हो सकें ! ऐसी हमारे ऊपर कृपा कीजिए। हे दयालु दाता। हमें ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि हम प्रत्येक दिन को शुभ अवसर बना सकें। प्रत्येक दिन की चुनौती का सामना करने के लिए हमें ऐसी शक्ति प्रदान कीजिए कि जिससे हम संघर्ष में विजयी हों। हमारे द्वारा संसार में कुछ भी बुरा न हो, प्रेमपूर्ण वातावरण में श्वास ले सकें तथा प्रेम को संपूर्ण संसार में बाँट सकें। हे प्रभु! हमें यह शुभाशीष दीजिए। यही आपसे हमारी विनती है, यही याचना है। इसे स्वीकार कीजिए।